
तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के हमलों में मौत की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। सरकारी मीडिया ने रविवार सुबह इसकी घोषणा की, जिसके बाद पूरे देश में 40 दिनों के शोक की घोषणा कर दी गई।
ईरानी सरकार ने तुरंत शोक अवधि की घोषणा करते हुए कहा कि राष्ट्र ध्वज आधा झुकाया जाएगा और धार्मिक आयोजन होंगे। खामेनेई के निधन से देश में शोक की लहर दौड़ गई है, जो तीन दशकों से सत्ता के शीर्ष पर थे।
फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, खामेनेई के चार परिजन भी इन्हीं हमलों में मारे गए, जिनमें उनकी बेटी, पोता और दामाद शामिल हैं। यह खबर ईरान की सत्ता संरचना को गहरा झटका देगी।
दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि उनके देश में खामेनेई की मौत पर शोक नहीं मनाया जाएगा। उन्होंने खामेनेई को बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं, प्रॉक्सी समूहों को समर्थन और अपने नागरिकों पर अत्याचार के लिए जिम्मेदार ठहराया। अल्बनीज ने कहा कि खामेनेई ऑस्ट्रेलियाई मिट्टी पर हमलों की साजिश रचने वाले थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर इसे ईरानियों के लिए देश पर नियंत्रण वापस लेने का सबसे बड़ा अवसर बताया। उन्होंने खामेनेई को इतिहास के सबसे क्रूर तानाशाहों में गिना और अमेरिकी खुफिया तंत्र व इजरायली सहयोग की तारीफ की।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रहेगा। भारी बमबारी अगले हफ्ते भी रुकेगी नहीं, जब तक मध्य पूर्व में शांति स्थापित न हो जाए। उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और सुरक्षाबलों से हथियार डालने की अपील दोहराई।
खामेनेई के निधन से ईरान में उत्तराधिकार की जंग तेज हो सकती है। क्षेत्रीय स्थिरता और न्यूक्लियर कार्यक्रम पर असर पड़ना तय है। दुनिया बांहें ताने इस घटना के परिणामों पर नजर रखे हुए है।