
अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण को पूरी तरह झूठों से भरा बताया है। बुधवार को ‘द परनास पर्सपेक्टिव’ पॉडकास्ट में बोलते हुए उन्होंने अर्थव्यवस्था, वोटिंग अधिकारों और ईरान नीति पर ट्रंप के दावों को खोखला करार दिया।
ट्रंप ने देश की मजबूत स्थिति का दावा किया, लेकिन हैरिस ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आम अमेरिकी परिवार महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं और आवास की ऊंची कीमतों से जूझ रहे हैं। उन्होंने दक्षिणी राज्यों की यात्रा का जिक्र किया जहां मिसिसिपी में एक मां से मुलाकात हुई। उसका चार सदस्यीय परिवार के लिए साप्ताहिक राशन का बजट महज 150 डॉलर था। ‘कार्ट में सब बच्चों के लिए था। मां ने कहा कि बच्चे न खाएं तो वह खा लेंगी। नल का पानी भूरा और जहरीला होने से पैदल बोतलबंद पानी लाना पड़ता है।’
हैरिस ने ट्रंप के प्रस्तावित बजट में मेडिकेड पर एक ट्रिलियन डॉलर की कटौती की कड़ी निंदा की। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी कटौतियों पर चुप्पी क्यों? सेव अधिनियम का विरोध करते हुए कहा कि यह जन्म प्रमाणपत्र या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज मांगता है, जो 40 प्रतिशत अमेरिकियों के पास नहीं हैं, जिससे वोटिंग अधिकार खतरे में पड़ेंगे।
ईरान के साथ तनाव पर चिंता जताते हुए हैरिस ने कहा कि ट्रंप के कदम अमेरिकी सैनिकों को युद्ध की चपेट में धकेल सकते हैं। ‘अमेरिकी जनता युद्ध नहीं चाहती। हमारे बेटे-बेटियां ऐसी जंग न लड़ें जो टाली जा सके।’ सहयोगी देश भी ट्रंप से सहमत नहीं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।
हैरिस का यह बयान राजनीतिक बहस को नई गर्मी दे रहा है।