
नई दिल्ली। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने साफ शब्दों में कहा है कि चीन ताइवान पर हमले को अमेरिका के वेनेजुएला के खिलाफ कदम से जायज नहीं ठहरा सकता। आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में बोल्टन ने राष्ट्रपति ट्रंप की भारत पर टैरिफ की धमकी और वैश्विक तनावों पर अपनी राय रखी।
वेनेजुएला में मादुरो ने 2024 चुनाव धांधली से जीते, विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को कुचला गया, जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया। यह 1989 के पनामा मामले जैसा है, जहां अमेरिका ने तानाशाह नोरिएगा के खिलाफ मदद की। बोल्टन ने कहा, अवैध नेता को पकड़ना तब गैरकानूनी नहीं जब वह सुरक्षा को खतरे में डालता हो।
लेकिन रूस का यूक्रेन पर हमला या चीन का ताइवान पर खतरा इससे अलग है। ताइवान लोकतांत्रिक देश है, जहां लोग स्वतंत्र चुनावों में अपनी मर्जी जाहिर करते हैं। सर्वे बताते हैं कि वे खुद को चीनी नहीं मानते और मुख्यभूमि से जुड़ना नहीं चाहते। चीन की धमकियां शांति के लिए बड़ा खतरा हैं।
भारत पर टैरिफ को बोल्टन ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया, दोनों देशों को चीन के महत्वाकांक्षाओं के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। ट्रंप की ग्रीनलैंड खरीदने वाली बात को उन्होंने ‘ट्रोलिंग’ कहा- मोलभाव का अंदाज, लेकिन सैन्य कार्रवाई आपदा लाएगी, नाटो टूट सकता है।
बोल्टन की यह राय अंतरराष्ट्रीय कानून और लोकतंत्र की अहमियत बताती है। गलत तुलनाओं से बचना होगा, वरना वैश्विक स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी।