
टोक्यो की रक्षा नीति में नया मोड़ आ गया है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने घोषणा की है कि 2031 तक ताइवान से महज 100 किलोमीटर दूर योनागुनी द्वीप पर हवाई और बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने वाली मिसाइलें तैनात कर दी जाएंगी। इस कदम से चीन के साथ तनाव और गहरा सकता है।
कोइज़ुमी ने पत्रकारों से कहा कि कार्य की गति पर निर्भर करेगा, लेकिन 2030 का लक्ष्य है। यह बयान प्रधानमंत्री साने ताकाइची के ताइवान सुरक्षा पर सख्त रुख के बाद आया है, जिसने कहा था कि चीन का हमला जापान के लिए खतरा बनेगा।
चीन ने ताकत से जवाब दिया- नागरिकों को जापान यात्रा से रोका, जापानी फर्मों के दोहरे उपयोग वाले निर्यात पर पाबंदी। बीजिंग ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है और बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करता।
2022 से जापान ने पश्चिमी द्वीपों को मजबूत करने का प्लान बनाया, फोकस रूस से हटाकर पूर्वी चीन सागर में चीनी गतिविधियों पर। सेनकाकू विवाद—जिसे चीन दियाओयू कहता है—150 किमी दूर ही है।
योनागुनी पर 2016 से एसडीएफ बेस है, जहां 160 जवान चीनी नौसेना पर नजर रखते हैं। 1500 निवासियों ने 2015 में बेस का समर्थन किया, लेकिन अब युद्ध का डर। द्वीप अपने छोटे घोड़ों और शार्क के लिए प्रसिद्ध है। कोइज़ुमी के हालिया दौरे में स्थानीयों को जानकारी का वादा किया।
क्षेत्रीय संतुलन बदल सकता है यह कदम, जहां जापान की रणनीति चीन को कड़ा संदेश दे रही है।