
टोक्यो में हालिया आम चुनावों के नतीजों ने जापान की सियासत को नई दिशा दी है। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) की ऐतिहासिक जीत के बाद संसद का विशेष सत्र 18 फरवरी को बुलाया जा रहा है, जहां प्रधानमंत्री का औपचारिक चयन होगा।
जापानी संविधान के मुताबिक, प्रतिनिधि सभा को चुनाव के 30 दिनों के भीतर विशेष डाइट सत्र बुलाना होता है। सत्र के पहले दिन वर्तमान कैबिनेट सामूहिक रूप से इस्तीफा देगी। उसके बाद नई प्रतिनिधि सभा और मौजूदा परिषद अलग-अलग वोटिंग कर प्रधानमंत्री नामित करेंगे, जो नई कैबिनेट गठित करेगा।
मतदान प्रक्रिया में पहले चरण में बहुमत पाने वाला उम्मीदवार सीधे विजयी होता है। बराबरी की स्थिति में शीर्ष दो आगे बढ़ते हैं और बहुमत से फैसला होता है। यदि दोनों सदन अलग नामित करें तो प्रतिनिधि सभा का निर्णय अंतिम माना जाता है।
एलडीपी के पास निचले सदन में 465 में से 316 सीटें हैं, जो दो-तिहाई बहुमत से अधिक है। गठबंधन साथी जापान इनोवेशन पार्टी को 36 सीटें मिलीं, कुल 352। ऐसे में एलडीपी अध्यक्ष और मौजूदा पीएम साने ताकाइची की जीत तय मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ताकाइची ने अपनी नीतियों के नकारात्मक प्रभाव पूर्ण रूप से उभरने से पहले ही तेज चुनाव अभियान से स्थिति मजबूत की। हालांकि, उनके दक्षिणपंथी रवैये और आर्थिक चुनौतियों पर सवाल बरकरार हैं। विपक्षी सेंट्रिस्ट रिफॉर्म अलायंस को महज 49 सीटें मिलीं, जो अपेक्षाओं से बहुत कम हैं। ताकाइची प्रशासन की असली कसौटी अब शुरू होगी।