
नई दिल्ली में बुधवार देर रात एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संवाद हुआ जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर लंबी चर्चा की। दोनों ने ईरान में तेजी से बिगड़ते हालात और उसके आसपास के क्षेत्रीय प्रभावों पर गहन विचार-विमर्श किया।
जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर बताया, ‘ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया। हमने ईरान और आसपास उभरते हालात पर बात की।’ यह बातचीत उसी समय हुई जब भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए कड़ी यात्रा सलाह जारी की।
सरकारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया, ‘ईरान के मौजूदा हालात को देखते हुए सभी भारतीय नागरिकों को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की यात्रा से पूर्णतः परहेज करने की सख्त हिदायत दी जाती है।’ यह 5 जनवरी की पिछली सलाह का सख्ती भरा विस्तार है।
ईरान में रह रहे भारतीयों को सतर्क रहने, विरोध प्रदर्शनों से दूर रहने, स्थानीय खबरों पर नजर रखने और तेहरान स्थित भारतीय दूतावास की वेबसाइट व सोशल मीडिया को चेक करने को कहा गया है। रेजिडेंट वीजा धारकों को दूतावास में पंजीकरण अनिवार्य बताया गया।
ईरान के प्रमुख शहरों में हिंसक आंदोलन चल रहे हैं, जिसमें जानमाल का भारी नुकसान हो चुका है। इससे न केवल आंतरिक अस्थिरता बढ़ी बल्कि पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है।
अमेरिका ने भी अपने नागरिकों को ‘तत्काल ईरान छोड़ने’ का आदेश दिया है, आर्मेनिया या तुर्की के रास्ते निकलने की सलाह दी। अमेरिकी अलर्ट में प्रदर्शनों के हिंसक होने, गिरफ्तारियां, चोटें, सड़कें बंद, ट्रांसपोर्ट बाधित और इंटरनेट कटौती की चेतावनी है। कई एयरलाइंस ने उड़ानें 16 जनवरी तक रोक दी हैं।
भारत की यह दोहरी रणनीति—कूटनीतिक संवाद और नागरिक सुरक्षा—क्षेत्रीय संकट से निपटने का मजबूत उदाहरण है। आने वाले दिनों में स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं।