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जयशंकर और अराघची के बीच पश्चिम एशिया संकट पर महत्वपूर्ण बातचीत

नई दिल्ली में रविवार को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संवाद हुआ जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर को ईरान के उनके समकक्ष अब्बास अराघची का फोन आया। दोनों ने पश्चिम एशिया में व्याप्त अस्थिरता पर विस्तार से चर्चा की,...

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Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|विदेश|
April 5, 2026
जयशंकर और अराघची के बीच पश्चिम एशिया संकट पर महत्वपूर्ण बातचीत
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नई दिल्ली में रविवार को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संवाद हुआ जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर को ईरान के उनके समकक्ष अब्बास अराघची का फोन आया। दोनों ने पश्चिम एशिया में व्याप्त अस्थिरता पर विस्तार से चर्चा की, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए खतरा बन चुकी है।

जयशंकर ने एक्स पर संक्षिप्त पोस्ट साझा की, जिसमें कहा गया कि मौजूदा स्थिति पर बात हुई। हालांकि ब्योरे सार्वजनिक नहीं किए गए, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच यह बातचीत बेहद प्रासंगिक है। यह मार्ग विश्व के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा ढोता है।

भारत के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक महत्व का है क्योंकि उसके तेल आयात का प्रमुख हिस्सा इसी रास्ते से आता है। ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थिरता अनिवार्य है। हालिया दिनों में कतर और यूएई के नेताओं के साथ भी जयशंकर की चर्चाएं हुईं, जो भारत की सक्रिय कूटनीति को दर्शाती हैं।

क्षेत्र में करोड़ों भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिनकी सुरक्षा चिंता का विषय है। ईरान तनाव के केंद्र में है, जहां सैन्य घटनाएं अनिश्चितता बढ़ा रही हैं। वैश्विक शक्तियां संयम की अपील कर रही हैं।

यह संवाद भारत की उन प्रयासों का हिस्सा है जो स्थिति का आकलन कर तनाव कम करने पर केंद्रित हैं। पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों में भारत की कूटनीतिक सक्रियता देश के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

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