
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 2026 का पहला विदेश दौरा 4 से 9 जनवरी तक फ्रांस और लक्जमबर्ग पूरा किया। इस यात्रा ने भारत और यूरोप के बीच साझा हितों को मजबूत करने पर खास जोर दिया।
पेरिस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भेंट के बाद यूरोप व विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के साथ द्विपक्षीय वार्ता हुई। चर्चा नवाचार, प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप्स, स्वास्थ्य, शिक्षा व मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में प्रगति पर केंद्रित रही। रक्षा, सुरक्षा, अंतरिक्ष, सिविल न्यूक्लियर, समुद्री सुरक्षा व रणनीतिक अर्थव्यवस्था में बढ़ते सहयोग पर भी विचार हुए।
वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। जयशंकर फ्रांस के राजदूतों की 31वीं बैठक में पहले गैर-यूरोपीय विदेश मंत्री के रूप में मुख्य अतिथि बने। उन्होंने वैश्विक परिवर्तनों व रणनीतिक स्वायत्तता की महत्ता रेखांकित की।
फ्रांस, जर्मनी व पोलैंड के विदेश मंत्रियों के साथ पहली भारत-वाइमर बैठक में भारत-यूरोप व भारत-ईयू संबंधों को गहरा करने पर बल दिया।
फ्रांसीसी सांसदों, भारत-फ्रांस मैत्री समूहों व संसदीय रक्षा-विदेश मामलों समिति से चर्चा हुई। आईईए के फतिह बिरोल व यूनेस्को के खालिद अल-एनानी से भी मुलाकात की।
लक्जमबर्ग में प्रधानमंत्री ल्यूक फ्रीडेन व उप-प्रधानमंत्री जेवियर बेटेल से बातचीत में संबंधों की समीक्षा हुई। राजनीतिक सहयोग, व्यापार-निवेश, वित्तीय सेवाएं, नवाचार, डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष व जन-जन संबंधों पर फोकस रहा।
भारतीय समुदाय को संबोधित कर उनके योगदान की सराहना की।
यह दौरा भारत के फ्रांस-लक्जमबर्ग द्विपक्षीय संबंधों व ईयू साझेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बदलते विश्व में भारत-यूरोप हितों का मेल प्रमुख है।