
रोम। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने संसद को संबोधित करते हुए अपनी सरकार की स्थिति स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि इटली न तो इस संघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से कूद रहा है और न ही इससे पूरी तरह विमुख हो रहा है।
दुनिया भर में इस संकट को लेकर चिंता व्याप्त है। यूरोपीय देश खाड़ी राष्ट्रों को सहायता देने को तैयार हैं, लेकिन अमेरिका से रिश्तों पर असर की आशंका से सतर्क हैं। सीनेट में मेलोनी ने जोर देकर कहा, “हम न तो दूसरों के निर्णयों में साझीदार हैं, न यूरोप में अलग-थलग पड़े हैं और न ही इस संकट से उत्पन्न आर्थिक प्रभावों के लिए उत्तरदायी।”
उन्होंने हाल की आलोचनाओं को खारिज करते हुए क्षेत्र में इटली की मजबूत प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। ईरान को मिसाइल क्षमता के साथ परमाणु हथियार हथियार करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे यूरोप पर तत्काल खतरा मंडरा सकता है और हथियारों की होड़ छेड़ी जा सकती है।
मेलोनी ने स्वीकार किया कि इटली खाड़ी देशों को हवाई रक्षा उपकरण दे रहा है, जैसा कि ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे अन्य यूरोपीय देश कर रहे हैं। कारण साफ हैं—ये मित्र राष्ट्र हैं, वहां हजारों इटालवी नागरिक रहते हैं और लगभग 2000 सैनिक तैनात हैं। यह कदम यूरोपीय एकता और रोकथाम का प्रतीक है।
कूटनीति पर जोर देते हुए मेलोनी ने कहा कि यूरोपीय साझेदारों के साथ संबंध मजबूत रखना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। वार्ता की गुंजाइश का आकलन किया जा रहा है, लेकिन ईरान के हमलों के जारी रहते यह संभव नहीं। मेलोनी का बयान इटली की संतुलित नीति को रेखांकित करता है।