वॉशिंगटन। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने सीनेटरों को बताया कि हालिया हमलों ने ईरान की सैन्य ताकत को बुरी तरह चोट पहुंचाई है। पारंपरिक युद्ध की क्षमता लगभग समाप्त हो चुकी है, फिर भी तेहरान की सरकार बनी हुई है और अमेरिकी हितों व क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है।

राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी को कहा, ‘हमले ईरान की सैन्य क्षमताओं पर पड़े हैं, जिससे इसकी ताकत काफी कम हो गई। अब उसके पास सीमित विकल्प बचे हैं।’
अधिकारियों ने आगाह किया कि ईरान अपनी सेना, मिसाइलों और ड्रोन ताकत दोबारा खड़ी करने की योजना बना रहा है। अगर शासन टिका रहा, तो यह प्रयास वर्षों चलेगा।
सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ ने जोर देकर कहा, ‘ईरान लंबे समय से अमेरिका का खतरा है और अभी भी तात्कालिक चुनौती।’ उन्होंने मिसाइल कार्यक्रम पर चिंता जताई, जो अमेरिका तक पहुंच बना सकता है।
ईरान अपने प्रॉक्सी के जरिए मध्य पूर्व में अमेरिका व सहयोगियों पर हमले जारी रखे हुए है। अर्थव्यवस्था की खराब हालत आंतरिक अशांति बढ़ा सकती है, लेकिन नेतृत्व मजबूत दिख रहा है।
हालिया ऑपरेशन ने परमाणु व मिसाइल ढांचे को नुकसान पहुंचाया। सीनेटरों ने पूछा कि क्या खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया। यह सुनवाई ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के बाद हो रही है, जिसमें ईरान के ठिकानों को निशाना बनाया गया।
क्षेत्र में सैन्य तैनाती बढ़ी हुई है, लेकिन ईरान की वापसी की आशंका बनी हुई है।
