
इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव कम करने के प्रयासों के केंद्र में पाकिस्तान उभर रहा है। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने छोटे प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान पहुंचकर शनिवार को सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर से महत्वपूर्ण वार्ता की।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई भी बैठक में मौजूद थे। मुनीर ने खुद को दोनों देशों के बीच मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत किया, जो पाकिस्तान की क्षेत्रीय भूमिका को मजबूत कर सकता है।
शुक्रवार देर रात इस्लामाबाद पहुंचने के बाद अराघची ने पाकिस्तानी नेतृत्व से कम से कम दो बार मुलाकात की। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी जल्द यहां पहुंचने वाला है, जबकि ईरान ने वाशिंगटन के साथ प्रत्यक्ष बातचीत से इनकार कर दिया है।
ईरान ने अपना पक्ष पाकिस्तान के समक्ष रखा, वहीं अमेरिका अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा। लेकिन इसी बीच जहाजों को सीज करने की कार्रवाई जारी है। अमेरिका होर्मुज में नाकाबंदी बनाए रखने पर अड़ा है, तो ईरान भी जलसंधि बंद रखने पर तुला हुआ है।
इससे तेल टैंकरों का पारगमन ठप हो गया है, जिसका असर वैश्विक स्तर पर दिख रहा है। कई देशों में ईंधन संकट और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक होर्मुज बंद रहने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रहार होगा।
दुनिया के देश ईरान-अमेरिका के बीच शीघ्र समझौते और स्थायी सीजफायर का समर्थन कर रहे हैं। पाकिस्तान के बाद अराघची ओमान और रूस जाएंगे, जहां 28 फरवरी से शुरू हमलों के नुकसान का ब्योरा देंगे।
ये कूटनीतिक प्रयास क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि इस्लामाबाद में सफलता मिली तो होर्मुज खुल सकता है, अन्यथा तनाव और बढ़ सकता है।
