
ईरान में खामेनेई शासन के खिलाफ उफान पर प्रदर्शनों के बीच एक युवा प्रदर्शनकारी इरफान सोलतानी को फांसी की सजा सुनाई गई है। 26 वर्षीय सोलतानी को 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था और अब बुधवार को उन्हें फांसी दी जानी है। ‘मोहरेबेह’ यानी खुदा से दुश्मनी के आरोप में यह सजा मौजूदा अशांति से जुड़ी पहली फांसी हो सकती है।
परिवार को सोलतानी के ठिकाने की जानकारी कई दिनों तक नहीं दी गई। अचानक सुरक्षा एजेंसियों ने सूचना दी कि मौत की सजा हो चुकी है, बिना किसी औपचारिक आरोप या अदालती सुनवाई के। आखिरी मुलाकात के लिए मात्र 10 मिनट का समय दिया गया। परिवार सदमे में है और मीडिया या कार्यकर्ताओं से बात न करने की धमकी दी गई है, वरना गिरफ्तारी का खतरा।
मानवाधिकार संगठनों ने इस तेजी से सजा को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। प्रदर्शन 20 दिनों से जारी हैं, 280 से अधिक स्थानों पर हिंसा, 2000 से ज्यादा मौतें और 20,000 गिरफ्तारियां। इंटरनेट 130 घंटे से बंद, स्टारलिंक प्रयासों को सैन्य जामर और छापों से विफल किया गया।
यह घटना शासन की दमनकारी रणनीति को उजागर करती है। वैश्विक चिंता बढ़ रही है, क्या यह फांसी विरोध को कुचल देगी या और भड़काएगी?