
ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के खिलाफ जनाक्रोश चरम पर है। महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त लोग सड़कों पर उतर आए हैं, और उनका गुस्सा अब खाड़ी देशों तक पहुंच चुका है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) में हलचल मच गई है, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बाद।
ट्रंप ने खामेनेई को साफ चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की तो अमेरिका जवाब देगा। वेनेजुएला जैसी कार्रवाई की यादें ताजा हैं, जिससे कयास लग रहे हैं कि अमेरिका इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला कर सकता है। जीसीसी देशों ने इस पर नजरें तरेर रखी हैं।
सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, कतर, बहरीन और ओमान ने गुप्त मंत्री स्तरीय बैठकें बुलाईं। संयुक्त बयान में कूटनीति और संयम की अपील की गई। विदेश मंत्री लगातार अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से संपर्क में हैं, ताकि तनाव न फैले। सऊदी ने ईरान से बातचीत का समर्थन जताया।
ओमान ने मध्यस्थता की पेशकश की, जबकि सभी देश ट्रंप के अगले कदम पर निगाहें लगाए हैं। ईरान की अस्थिरता खाड़ी के लिए खतरा है, जो तेल बाजार और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। जीसीसी का रुख सतर्क है—युद्ध से बचना प्राथमिकता। क्या कूटनीति कामयाब होगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
