
ईरान की सड़कें इन दिनों गुस्से की आग में जल रही हैं। सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने विकराल रूप धारण कर लिया है, जिसमें अब तक 60 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और हजारों गिरफ्तार हो चुके हैं। दिसंबर 2025 में आर्थिक समस्याओं से शुरू हुए ये विरोध अब सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को सीधी चुनौती दे रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 62 मौतें पुष्ट हो चुकी हैं, जो 65 से ऊपर जा सकती हैं। 31 प्रांतों के 180 शहरों में 512 स्थानों पर धरना-प्रदर्शन जारी हैं। शुरुआत तेहरान के बाजारों से हुई, जहां महंगाई, बेरोजगारी और रियाल की कीमत गिरने पर लोग उतरे। अब यह धार्मिक शासन के खिलाफ विद्रोह बन चुका है।
सरकारी मीडिया ने पहली बार हताहतों को स्वीकारा, लेकिन आंकड़े छिपाए और अमेरिका-इजरायल पर दोष मढ़ा। खामेनेई ने ट्रंप को घमंडी और खून से सना बताया, जून की जंग का हवाला देकर सख्ती का संकेत दिया। टीवी पर ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे गूंजे।
निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने ट्रंप से हस्तक्षेप की गुहार लगाई। इससे प्रदर्शन और तेज हो गए, कई जगह उनकी वापसी की मांग उठी। उनके पिता 1979 की क्रांति में शाह थे।
संचार बाधित होने के बावजूद आंदोलन थम नहीं रहा। ईरान संकट के गहरे गर्त में है, जहां छोटी चिंगारी बड़ी क्रांति बन सकती है।