
ईरान की सड़कों पर एक बार फिर आग भड़क रही है। एक महिला के होंठों पर सिगरेट दबाए सर्वोच्च नेता की तस्वीर जला रही हो, यह तस्वीर 2009 की उस घटना को याद दिला देती है जब नेदा आगा-सोल्तान की हत्या ने दुनिया को हिला दिया था।
20 जून 2009 को फर्जी चुनाव नतीजों के खिलाफ प्रदर्शन चल रहे थे। नेदा, एक साधारण युवती, सड़क किनारे खड़ी थीं जब एक गोली ने उन्हें हमेशा के लिए शांत कर दिया। मात्र दो मिनट में उनका अंत हो गया। किसी passer’s वीडियो ने उस दर्द को कैद कर लिया, जो सोशल मीडिया पर फैल गया और नेदा संघर्ष का प्रतीक बन गईं।
‘नेदा’ का अर्थ ही ‘आवाज’ है। उनकी मां उन्हें आजाद ख्याल बताती हैं, जो चादर से नफरत करती थीं और महिलाओं के अधिकारों की पैरवी करती थीं। आज महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक बंधनों के खिलाफ उतर आए लोग उसी जज्बे को जगा रहे हैं।
महिलाओं की भूमिका सबसे प्रमुख है। वे हिजाब जला रही हैं, गिरफ्तारियां दे रही हैं। इंटरनेट बंदी और दमन के बावजूद डिजिटल माध्यम आवाज बुलंद कर रहे हैं। नेदा की याद बताती है कि सत्य को दबाना असंभव है। ईरान बदलाव की दहलीज पर खड़ा है।
