
ईरान में आर्थिक मंदी ने पूरे देश को आग के गोले में बदल दिया है। बढ़ती महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें सुरक्षा बलों की गोलीबारी से कम से कम 27 लोग मारे जा चुके हैं। इलाम प्रांत के अबदानान शहर से वायरल वीडियो में हजारों लोग, छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सड़कों पर उतरकर नारे लगा रहे दिखे।
मंगलवार रात हेलीकॉप्टरों की गड़गड़ाहट के बीच प्रदर्शनकारियों की संख्या सुरक्षाकर्मियों से कहीं अधिक थी। नॉर्वे स्थित मानवाधिकार संगठन के अनुसार, क्रैकडाउन में 27 की मौत हुई, जिनमें पांच नाबालिग बच्चे शामिल हैं। सरकार ने भी स्वीकार किया कि एक पुलिसकर्मी की हत्या हुई।
सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने उपद्रवियों पर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया। 28 दिसंबर से शुरू हुए हंगामे तेज हो गए हैं, जहां दुकानदारों ने कारोबार ठप कर विरोध जताया। तेहरान के बाजारों में भी यही नजारा दिखा।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने 8-9 जनवरी रात 8 बजे नारे लगाने की अपील की। यह आंदोलन 2022-23 के प्रदर्शनों से बड़ा माना जा रहा है।