
ईरान की सड़कों पर युवा पीढ़ी जेन-जी का गुस्सा फूट पड़ा है। बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से तंग आकर सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ जोरदार नारेबाजी हो रही है। नेपाल के बाद अब ईरान में आर्थिक संकट ने हिंसक विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया है। पिछले पांच दिनों से जारी ये प्रदर्शन अब खूनी रूप धारण कर चुके हैं, जिसमें कम से कम छह लोगों की मौत हो चुकी है।
फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, तेहरान से 300 किलोमीटर दूर लोरेस्तन प्रांत के अजना शहर में गुरुवार को विरोध के दौरान तीन लोग मारे गए और 17 घायल हुए। प्रदर्शनकारियों ने ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सड़कों पर आगजनी और गोलियों की आवाज साफ सुनाई दे रही है। लोग ‘बेशर्म! बेशर्म!’ चिल्ला रहे थे।
इसके पहले चहारमहल और बख्तियारी प्रांत के लॉर्डेगन में दो लोगों की मौत हुई। यहां जेन-जी युवाओं ने गवर्नर ऑफिस, मस्जिद, शहीद फाउंडेशन, टाउन हॉल और बैंकों पर पत्थरबाजी की। पुलिस ने आंसू गैस से जवाब दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के 21 प्रांतों तक हिंसा फैल चुकी है। 2022 के बाद ये सबसे बड़ा विरोध माना जा रहा है।
मुख्य कारण आर्थिक संकट है। करेंसी की कीमतें गिर रही हैं, बेरोजगारी चरम पर है। महंगाई दर 42.2 प्रतिशत पहुंच गई है, खासकर खाद्य वस्तुओं की कीमतें 72 प्रतिशत उछल चुकी हैं। धार्मिक मुद्दों के बजाय इस बार आर्थिक असंतोष सुप्रीम लीडर के खिलाफ है। बुधवार को स्कूल, विश्वविद्यालय और बैंक बंद कर दिए गए थे। ईरान में जेन-जी आंदोलन तेज हो रहा है, जो महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ बड़ा संदेश दे रहा है।