
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे परमाणु विवाद को सुलझाने की दिशा में नया कदम उठाया गया है। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची बुधवार को एक राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए जेनेवा के लिए प्रस्थान कर गए। यहां तीसरे दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता होनी है, जो पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के कारण बढ़े तनाव के बीच महत्वपूर्ण है।
अराघची ने मंगलवार को एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा कि ईरान गुरुवार को अमेरिका संग बातचीत फिर शुरू करेगा। उन्होंने न्यायपूर्ण और समान समझौते का संकल्प जताया। दोनों देशों के पास ऐतिहासिक मौका है, जहां पारस्परिक चिंताओं का हल निकालकर साझा हितों की रक्षा की जा सके। कूटनीति को प्राथमिकता देने पर समझौता संभव है, यह उनका स्पष्ट संदेश था।
ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने कहा कि अमेरिका के प्रति सभी रास्ते खुले हैं—गरिमामय कूटनीति से लेकर पछतावे वाली रक्षा तक। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी डिप्लोमेसी को तरजीह दी, लेकिन ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं बनाने दूंगा, यह उनका कड़ा रुख था।
उप विदेश मंत्री मजिद तक़्त रावांची ने एनपीआर को दिए साक्षात्कार में कहा कि परमाणु समझौते के लिए ईरान जो भी जरूरी करेगा, करेगा। जेनेवा में पूर्ण ईमानदारी से प्रवेश करेंगे और अमेरिका से भी सद्भावना की उम्मीद है। राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो जल्द समझौता हो सकता है।
ये वार्ताएं क्षेत्रीय स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकती हैं। सफलता मिली तो तनाव कम होगा, अन्यथा उलझनें बढ़ेंगी। ईरान की यह पहल कूटनीति पर भरोसे को दर्शाती है।