
अमेरिका की वेनेजुएला पर कार्रवाई से वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई है। भारत जैसे आयातक देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने हाल ही में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि भारत के हितों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
भारत ने वेनेजुएला में करीब 6 अरब डॉलर का निवेश किया था। वहां से कच्चा तेल आयात होता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों ने इसे रोक दिया। ओएनजीसी विदेश की अगुवाई में सैन क्रिस्टोबल में 40 फीसदी और काराबोबो-1 में 11 फीसदी हिस्सेदारी है। श्रृंगला ने कहा, ‘वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, सऊदी से भी ज्यादा। इस रिश्ते को फिर से जोड़ना जरूरी है।’
उन्होंने सलाह दी कि कंपनियों के हितों की रक्षा करें और सही समय का इंतजार करें। जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, सत्ता परिवर्तन से ओएनजीसी को 500 मिलियन डॉलर का बकाया डिविडेंड मिल सकता है। अमेरिकी नियंत्रण के बाद निर्यात प्रतिबंध हट सकते हैं, जिससे तेल कीमतें गिरेंगी।
ट्रंप ने प्रतिबंध जारी रखने की बात कही है, लेकिन स्थिति सुधरने पर भारत को फायदा होगा। यह संकट भारत को तेल स्रोतों में विविधीकरण की याद दिलाता है। श्रृंगला की बातें रणनीतिक धैर्य की मिसाल हैं।