
नई दिल्ली/तेहरान। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची की चर्चा के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से पार होने की इजाजत दे दी है। यह कदम पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस के परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ नामक भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से पार हो चुके हैं, जबकि अमेरिका, यूरोप व इजरायल के जहाजों पर पाबंदी बरकरार है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय बदलावों पर विस्तार से चर्चा की, जिसमें होर्मुज मार्ग प्रमुख रहा। युद्ध प्रारंभ होने के बाद यह तीसरी बातचीत थी।
एक अन्य घटना में, सऊदी अरब का कच्चा तेल लादे लाइबेरिया ध्वज वाले टैंकर ने होर्मुज पार कर मुंबई बंदरगाह पर डकिंग की। जहाज के कप्तान भारतीय थे। ‘शेनलॉन्ग स्वेजमैक्स’ ने 1 मार्च को रास तनुरा से लोडिंग की और 3 मार्च को रवाना हुआ। ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक 8 मार्च को यह होर्मुज के अंदर था।
ईरान पर हमलों से समुद्री यातायात मंदा पड़ा है, ऐसे में यह भारत पहुंचने वाला पहला टैंकर बना। भारत की ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं की चिंता कम हुई है। एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था भारत होर्मुज पर अत्यधिक निर्भर है, जहां से 50% से अधिक आयात होता है।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद 28 भारतीय जहाज इलाके में हैं। आठ जहाज पूर्वी हिस्से से सुरक्षित निकल चुके। रिपोर्ट में ‘देश महिमा’, ‘देश अभिमान’, ‘स्वर्ण कमल’, ‘विश्व प्रेरणा’, ‘जग विराट’, ‘जग लोकेश’, ‘एलएनजीसी असीम’ अरब सागर पहुंचे। ‘जग लक्ष्य’ अंगोला जा रहा। तनाव के बावजूद ये सफलताएं सकारात्मक हैं।