
भारत और कुवैत के बीच गहरे और बहुआयामी संबंध हैं, जो ऊर्जा, व्यापार और प्रवासी समुदाय पर टिके हैं। खाड़ी के इस महत्वपूर्ण देश में 1961 तक भारतीय रुपया वैध मुद्रा के रूप में इस्तेमाल होता था। 5.02 लाख की आबादी और 17,818 वर्ग किमी क्षेत्र वाले कुवैत ने भारत को हमेशा भरोसेमंद साझेदार माना है।
1961 में कुवैत की आजादी के बाद दोनों देशों के राजनयिक रिश्ते शुरू हुए। संप्रभुता और अखंडता का सम्मान इसकी नींव है। भारत खाड़ी में शांति का पक्षधर रहा, तो कुवैत ने वैश्विक मंचों पर भारत का साथ दिया।
विदेश मंत्रालय स्तर पर नियमित संवाद, राजनीतिक चर्चाएं और उच्च यात्राएं जारी हैं। पीएम मोदी का 21-22 दिसंबर 2024 का दौरा ऐतिहासिक था—43 साल बाद किसी भारतीय पीएम की कुवैत यात्रा। इससे पहले 1981 में इंदिरा गांधी गई थीं।
तेल से पहले खजूर और घोड़ों का व्यापार होता था। 1962 के भारत-चीन युद्ध में कुवैत ने भारत का समर्थन किया, लेकिन 1990 के इराक संकट में तनाव आया।
कुवैत में 10 लाख से ज्यादा भारतीय कार्यरत हैं, जो स्वास्थ्य, निर्माण, आईटी जैसे क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। भारत कुवैत से कच्चा तेल, रसायन, विमान पुर्जे आयात करता है, जबकि निर्यात में चावल, दवाएं, कपड़े, आईटी शामिल हैं।
मोदी नेतृत्व में संबंध और मजबूत हुए हैं, जो भविष्य में निवेश और ऊर्जा सहयोग बढ़ाएंगे।
