
श्रीलंका में चक्रवात दित्वाह ने भयंकर तबाही मचाई थी, लेकिन भारत का ऑपरेशन सागर बंधु इस संकट से उबरने में लगातार सहयोग दे रहा है। पिछले नवंबर से शुरू यह मानवीय सहायता अभियान भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स के दम पर महत्वपूर्ण पुलों और सड़कों को बहाल कर रहा है।
केंद्रीय प्रांत के कैंडी को उवा प्रांत के बादुल्ला से जोड़ने वाला बी-492 पुल दित्वाह की चपेट में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। भारतीय सैनिकों ने 15 और 21 किलोमीटर पर बैली ब्रिज तेजी से बनाकर स्थानीय लोगों को फिर से जोड़ा है। इससे यात्रा समय कम हुआ और समुदायों के बीच संपर्क बहाल हो गया।
सोशल मीडिया एक्स पर साझा वीडियो में एक स्कूली छात्रा भावुक होकर कहती है, ‘आपकी सेवा के लिए सच्चा धन्यवाद, भारत से इतनी दूर आकर। टूटे पुल से हमारी राह बंद थी, आपने सब ठीक कर दिया।’ यह वीडियो भारत-श्रीलंका भाईचारे को मजबूत करने का प्रतीक है।
दित्वाह के लैंडफॉल के तुरंत बाद शुरू ऑपरेशन सागर बंधु में आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरी जैसे जहाजों ने पहले प्रतिक्रिया दी। ये जहाज श्रीलंकाई नौसेना के 75वें स्थापना दिवस पर पहले से ही वहां मौजूद थे। बाढ़, भूस्खलन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षति ने देश की आपदा प्रणाली को प्रभावित किया, तब भारत ने त्वरित एचएडीआर सहायता दी।
कैंडी जिले के महियांगनया में भारतीय सेना ने फील्ड अस्पताल स्थापित किया, जहां प्रतिदिन 1000-1200 मरीजों को ट्रॉमा, सर्जरी और चिकित्सा सुविधाएं मिलीं। यह निरंतर प्रयास न केवल पुनर्निर्माण कर रहा है, बल्कि पड़ोसी देशों के बीच मजबूत रिश्तों का उदाहरण पेश कर रहा है। ऑपरेशन सागर बंधु श्रीलंका की पुनर्बहाली में मील का पत्थर साबित हो रहा है।