
नई दिल्ली। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने घोषणा की है कि 60 से अधिक देशों के साथ गठित संसदीय मित्रता समूह विशेष राष्ट्रों से संबंधों को और सघन बनाएंगे। यह कदम भारत की विदेश नीति में संसदीय कूटनीति को प्रमुख आधार प्रदान करेगा।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 64 देशों के साथ इन समूहों का गठन किया है। यह प्रयास भारत के अंतर-संसदीय संबंधों को विस्तार देने और विधायी संवादों के माध्यम से परंपरागत कूटनीति को समर्थन देने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
एक्स पर पोस्ट में रिजिजू ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव पर यह पहल शुरू हुई। अब 60 से ज्यादा देशों के साथ ये समूह सक्रिय हैं, जो वैश्विक लोकतांत्रिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं।
विभिन्न दलों के वरिष्ठ सांसद जैसे रविशंकर प्रसाद, पी चिदंबरम, शशि थरूर, हेमा मालिनी आदि इन समूहों का नेतृत्व करेंगे। पहले चरण में श्रीलंका, जर्मनी, अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस समेत कई देश शामिल हैं।
इन समूहों का उद्देश्य विधायक-से-विधायक संवाद, अनुभव साझा करना, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान और व्यापार, प्रौद्योगिकी, सामाजिक नीतियों तथा वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा है। नियमित बैठकें, अध्ययन भ्रमण और संयुक्त विचार-विमर्श से विश्वास और समझ बढ़ेगी।
यह पहल ऑपरेशन सिंदूर के बाद बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों की परंपरा को संस्थागत रूप देती है, जो राष्ट्रीय हितों पर एकजुटता दिखाती है। बिरला का यह फैसला संसद को वैश्विक मंच पर सक्रिय बनाता है।
पार्टी सीमाओं से ऊपर उठकर यह भारत के लोकतंत्र की गहराई को प्रदर्शित करता है तथा राष्ट्रों के बीच सहयोग का पुल साबित होगा।