
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, जिससे मध्य पूर्व में हवाई यात्रा और समुद्री व्यापार ठप हो गया है। हजारों भारतीय फंस चुके हैं। ऐसे में भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस सूरत ओमान की खाड़ी में तैनात है, जो जरूरत पड़ने पर निकासी अभियान चला सकता है।
ऑपरेशन संकल्प और अदन की खाड़ी में एंटी-पायरेसी मिशन के तहत नौसेना लगातार सक्रिय है। आईएनएस सूरत स्टील्थ तकनीक से लैस है, जो दुश्मन रडार से बचकर ऑपरेशन कर सकता है। इसमें ब्रह्मोस मिसाइलें, 32 सतह से हवा मिसाइलें, पनडुब्बीरोधी हथियार और आधुनिक रडार हैं।
यह 163 मीटर लंबा जहाज 7400 टन का है और 30 नॉट की रफ्तार पकड़ सकता है। 2017 से मिशन डेप्लॉयमेंट में छह युद्धपोत महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर तैनात हैं—होरमुज स्ट्रेट से 80 फीसदी तेल आयात, अदन से 90 फीसदी व्यापार।
नौसेना का इतिहास गौरवशाली है: 2023 में सूडान से कावेरी, 2020 में कोरोना के दौरान समुद्र सेतु, 2015 में यमन से राहत, 2011 लीबिया से सेफ होमकमिंग, 2006 लेबनान से सुकून। सभी में हजारों भारतीय सुरक्षित लाए गए।
समुद्री डकैती वाले क्षेत्रों में संयुक्त अभ्यास और राहत कार्य होते हैं। अदन अवरुद्ध होने पर केप ऑफ गुड होप का लंबा रास्ता अपनाना पड़ता है, जो महंगा साबित होता है। आईएनएस सूरत भारतीयों की ढाल बनेगी।