
वॉशिंगटन में 20-21 जनवरी को हुई यूएस-भारत ड्रग पॉलिसी एग्जीक्यूटिव वर्किंग ग्रुप की पहली बैठक ने नशीले पदार्थों की वैश्विक चुनौतियों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए दृढ़ संकल्प जताया।
ओएनडीसीपी की निदेशक सारा कार्टर ने बैठक का शुभारंभ किया, जिसमें ट्रंप और मोदी की नार्को-आतंकवाद उन्मूलन की प्रतिबद्धता पर बल दिया गया। उन्होंने कहा कि ड्रग संकट अब राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रमुख मुद्दा है, और यह ग्रुप परिवारों की रक्षा के साथ वैध उद्योगों को बढ़ावा देगा।
भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा ने तस्करी और पूर्ववर्ती रसायनों के खतरे पर भारत की प्राथमिकता बताई, साथ ही वैध व्यापार को सुगम बनाने के साथ सख्त प्रवर्तन का संतुलन रेखांकित किया। डेबी सेगुइन और मोनिका आशीष बत्रा के नेतृत्व में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने काउंटर-नारकोटिक्स सहयोग को मजबूत करने पर काम किया।
चर्चा में पूरे सरकारी दृष्टिकोण, अंतर-एजेंसी समन्वय, फार्मास्यूटिकल सप्लाई चेन की सुरक्षा और हालिया संयुक्त अभियानों की सफलताओं पर जोर रहा। अमेरिका-भारत सुरक्षा साझेदारी के विस्तार में नशीले पदार्थ विरोधी प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, क्योंकि तस्करी नेटवर्क सीमाओं को लांघते हैं।
यह पहल दोनों देशों के लिए नई उम्मीद जगाती है, जो वैश्विक स्तर पर ड्रग तस्करी के खिलाफ मजबूत मोर्चा खोलने का संकेत देती है।