
नई दिल्ली। दक्षिण एशिया विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते ने अमेरिका को भारत संग डील करने के लिए मजबूर कर दिया है। एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की फरवा आमेर ने बताया कि ईयू के साथ सौदा अमेरिकी वार्ताओं को गति देने वाला बड़ा कारण बना।
वार्ताएं तो पहले से चल रही थीं, लेकिन ईयू डील का समयबद्ध ऐलान ने वाशिंगटन पर दबाव बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर चर्चा के बाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा की। इसके तहत अमेरिका भारत से आयात पर शुल्क 25% से घटाकर 18% करेगा। साथ ही रूस से तेल खरीद को लेकर लगे 25% दंडात्मक शुल्क को भी हटा लिया जाएगा।
एक साल की कठिन सौदेबाजी के बाद यह सफलता मिली। आमेर ने रूस संबंधों पर जोर दिया- भारत तेल स्रोत बदल रहा है, लेकिन मॉस्को से रिश्ते संतुलित रखेगा। शीर्ष नेतृत्व की बातचीत ने राह बनाई।
ट्रेड विशेषज्ञ वेंडी कटलर के अनुसार, इससे भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया पर बढ़त मिलेगी। अमेरिका में भारतीय सामान पर 18% शुल्क, जबकि आसियान पर 19-20%। कटलर बोलीं, ईयू से बेहतर डील मिली हो सकती है। भारत ने शुल्क व गैर-शुल्क बाधाएं कम करने का वादा किया, हालांकि ट्रंप की भाषा अस्पष्ट है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा- भारत शुल्क-बाधाओं को शून्य करने की ओर बढ़ेगा। कुल मिलाकर यह समझौता महत्वपूर्ण खनिजों, तकनीक व सप्लाई चेन पर सहयोग का द्वार खोलेगा।
इधर विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका गए हैं, जहां महत्वपूर्ण खनिजों की बैठक में शरीक होंगे। यह द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का संकेत है।