
नई दिल्ली में गुरुवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के इंटरनेशनल सोलर एलायंस (आईएसए) से हटने के बावजूद भारत अपना पूरा समर्थन जारी रखेगा। यह बयान उस समय आया जब मीडिया में खबरें आईं कि अमेरिका ने 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से निकलने का फैसला किया है, जिसमें आईएसए भी शामिल है।
आईएसए में वर्तमान में लगभग 125 देश सदस्य हैं। यह संगठन सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है, खासकर विकासशील देशों में। इसका मुख्य लक्ष्य सदस्य राष्ट्रों की जरूरतों के मुताबिक साझा चुनौतियों का सामना करना है, जैसे वित्तीय बाधाएं, तकनीकी कमी और क्षमता निर्माण।
अधिकारी ने कहा कि भारत सबसे कम विकसित देशों और छोटे द्वीपीय राष्ट्रों के लिए सौर ऊर्जा परियोजनाओं को लागू करने, फंड जुटाने और जोखिम कम करने में सक्रिय रहेगा। यह प्रतिबद्धता वैश्विक ऊर्जा पहुंच को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
व्हाइट हाउस के बयान के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 66 संगठनों के लिए अमेरिकी सहायता रोकने का कार्यकारी आदेश जारी किया। यह संयुक्त राष्ट्र से जुड़े जलवायु संगठनों की समीक्षा का नतीजा है। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही यूएनएफसीसीसी जैसे मंचों से दूरी बना ली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के सबसे बड़े प्रदूषक और अर्थव्यवस्था के तौर पर अमेरिका का पीछे हटना जलवायु युद्ध को कमजोर करेगा। लेकिन भारत की मजबूत स्थिति आईएसए को नई गति देगी।
भारत और फ्रांस द्वारा शुरू किया गया आईएसए सौर क्रांति का प्रतीक है। आने वाले समय में यह और अधिक देशों को सौर ऊर्जा की मुख्यधारा से जोड़ेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा दोनों मजबूत होंगे।