
संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक बार फिर पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दा उठाया, लेकिन भारत ने इसका कड़ा जवाब देते हुए आत्मनिर्णय के सिद्धांत का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। महासभा में संयुक्त राष्ट्र के कामकाज पर महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान यह वाकया हुआ।
पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असिम इफ्तिखार अहमद ने फिलिस्तीनियों के आत्मनिर्णय का जिक्र करते हुए कश्मीर को जोड़ दिया और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता विस्तार का भी विरोध किया, जो मुख्य रूप से भारत के खिलाफ है।
भारत के मिशन के काउंसलर एल्डोस पुनूस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान हर मंच पर अपने विभाजनकारी एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए आत्मनिर्णय का गलत इस्तेमाल कर रहा है, जो लोकतांत्रिक देशों में अलगाव को भड़काने का प्रयास है।’
पुनूस ने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर का यह सिद्धांत बहुलतावादी समाजों को तोड़ने के लिए नहीं है। पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर का बेवजह उल्लेख अब आम हो गया है, लेकिन झूठे आरोपों और विकृत तस्वीर पेश करने की आदत छोड़ देनी चाहिए।
भारत ने 1948 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 47 का हवाला दिया, जो पाकिस्तान से पूरी तरह सेना हटाने की मांग करता है—जो कभी पूरा नहीं हुआ। कश्मीर में बार-बार हुए चुनावों में भारी मतदान और चुने गए नेताओं ने भारत के प्रति निष्ठा साबित कर दी है, जिससे जनमत संग्रह अप्रासंगिक हो गया है।
सुरक्षा परिषद सुधार पर पाकिस्तान की राय से अधिकांश सदस्य, विशेषकर अफ्रीकी देश, सहमत नहीं हैं। यह घटना भारत की संप्रभुता पर अडिग रुख को रेखांकित करती है।