जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में भारत ने अल्पसंख्यक मामलों के विशेषज्ञ की वक्फ संशोधन अधिनियम पर रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया। भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर गौरव कुमार ठाकुर ने इसे तथ्यों से परे और देश-विरोधी करार दिया।

ठाकुर ने कहा कि प्रोफेसर लेवराट के दावे ऐतिहासिक संदर्भों से विमुख हैं और रिपोर्ट का लहजा भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण है। विशेषज्ञ ने दावा किया था कि यह कानून मुस्लिम समुदायों के धार्मिक स्थलों के नियंत्रण को प्रभावित करता है, लेकिन ठाकुर ने इसे प्रगतिशील सुधार बताया जो पारदर्शिता, लैंगिक समानता और कुशल प्रशासन लाता है।
इस कानून से बोहरा और अगाखानी जैसे अल्पसंख्यक मुस्लिम संप्रदाय मजबूत होते हैं, क्योंकि यह उनके समुदायिक हितों और पूजा स्थलों की स्थापना के संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करता है। ठाकुर ने रिपोर्ट को कुछ संगठनों की सलाह पर आधारित बताते हुए आरेाप लगाया कि वे भारत की बहुसांस्कृतिकता को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं, जिसमें न्यूयॉर्क की इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल शामिल है।
भारत सभी जातीय, धार्मिक व भाषाई अल्पसंख्यकों को सशक्त बनाने के लिए कटिबद्ध है। संविधान सभी को मौलिक अधिकार देता है, अल्पसंख्यकों को उनकी पहचान, शैक्षिक संस्थानों का प्रशासन और भाषा चुनाव का अधिकार प्रदान करता है। वक्फ कानून महिलाओं के प्रतिनिधित्व, उत्तराधिकार अधिकारों और विभिन्न संप्रदायों की भागीदारी सुनिश्चित करता है। यह भारत की समावेशी नीतियों का प्रमाण है।
