
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के भारत में अल्पसंख्यकों के प्रति कथित दमन के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए उसे उसके अपने घर की करतूतें याद दिलाई हैं। शुक्रवार को साप्ताहिक प्रेस वार्ता में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ कहा कि पाकिस्तान को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने देश में अल्पसंख्यकों की बदतर स्थिति पर गौर करना चाहिए।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने दिल्ली के तुर्कमान गेट क्षेत्र में फैज-ए-इलाही मस्जिद के निकट अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। जायसवाल ने पलटवार किया कि ऐसे बयान देने वालों को अपना रिकॉर्ड जांच लेना चाहिए, जहां अल्पसंख्यकों पर जुल्म आम बात है।
दिल्ली नगर निगम ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की, जिसमें मस्जिद और आसपास के अवैध निर्माण हटाए गए। यह भारत की कानून व्यवस्था का हिस्सा है। पिछले महीने भी भारत ने पाक के इसी तरह के दावों को ठुकरा दिया था, साथ ही उसके अल्पसंख्यक अत्याचारों पर पर्दा उठाया।
नई दिल्ली के इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में 2024 में 344 ईशनिंदा के मामले दर्ज हुए। 2021-2024 के बीच 421 अल्पसंख्यक लड़कियां-महिलाएं जबरन धर्म परिवर्तित की गईं, जिनमें 71 प्रतिशत नाबालिग थीं। लाहौर के सेंटर फॉर सोशल जस्टिस के आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं।
पाकिस्तान में हिंदुओं को दोयम दर्जा, इस्लाम का राजनीतिक दुरुपयोग और भारत-विरोधी माहौल देश की पहचान में गहरे अंतर्विरोध पैदा करता है। भारत का यह जवाब पाकिस्तानी प्रचार को करारा जवाब है, जो सच्चाई पर आधारित है।