
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापारिक रणनीति ने भारत-अमेरिका संबंधों में बदलाव ला दिया है। फॉरेन अफेयर्स के विश्लेषण के अनुसार, चीन के खिलाफ साझेदारी की उम्मीदें पूरी न होने पर नई दिल्ली अब वैकल्पिक गठबंधनों की ओर बढ़ रही है।
जनवरी में यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौता इसकी मिसाल है। यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे सभी समझौतों की आधारशिला बताया, जिसमें 30 अरब यूरो के निर्यात लाभ का अनुमान है। रक्षा pact सहित अन्य करारों ने संबंधों को मजबूत किया।
ऑस्ट्रेलिया, यूएई जैसे देशों के साथ हालिया समझौते भारत की अर्थव्यवस्था को एकाधिकार से मुक्त कर रहे हैं। लेख में सुझाव है कि भारत को सीपीटीपीपी में शामिल होना चाहिए, जो ट्रंप के टीपीपी से बाहर निकलने के बाद अस्तित्व में आया।
इसके 12 सदस्य विश्व जीडीपी का 15 प्रतिशत कवर करते हैं। टैरिफ समाप्ति से लेकर श्रम, आईपी मानकों तक, यह सुधारों को प्रोत्साहित करता है। कंबोडिया, दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल होने को बेताब हैं। भारत के लिए यह बाजार पहुंच, निर्यात बढ़ावा और सप्लाई चेन एकीकरण लाएगा। चुनौतियां हैं, लेकिन लाभ अपार।