
वॉशिंगटन में हड़कंप मच गया है क्योंकि ट्रंप प्रशासन की आक्रामक टैरिफ रणनीति पूरी तरह फेल साबित हो रही है। वेदा पार्टनर्स की सह-संस्थापक हेनरीटा ट्रेज ने सीएनबीसी को दिए साक्षात्कार में खुलासा किया कि इस साल भारत ने अमेरिका से दोगुने व्यापार समझौते कर लिए हैं। यह खबर अमेरिकी सांसदों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है।
ट्रेज ने बताया कि वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट और यूएसटीआर जेमीसन ग्रीर ने 90 दिनों में 90 सौदों का वादा किया था, लेकिन 10 महीनों में सिर्फ दो समझौते ही हो सके—कंबोडिया और मलेशिया के साथ। दक्षिण कोरिया वाला डील रुका हुआ है, जो पहले 96 प्रतिशत व्यापार को शून्य टैरिफ कवर करता था।
यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया पर टैरिफ का डंडा चलाने से कोई फायदा नहीं हुआ। ट्रेज ने कहा कि 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ खत्म करने के पक्ष में हैं और सुप्रीम कोर्ट से इसकी मांग कर रहे हैं। इससे व्हाइट हाउस का आर्थिक संदेश कमजोर पड़ रहा है।
राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। ट्रंप को अर्थव्यवस्था पर वोटरों का भरोसा बहाल करना है, लेकिन व्यापार नीति राष्ट्रपति के समर्थन और रिपब्लिकन पार्टी के आंकड़ों को नीचे खींच रही है। ‘अमेरिका पहले बेचो’ की रणनीति के बावजूद, रुकी व्यापार वृद्धि का असर अनदेखा नहीं किया जा सकता।