
अबू धाबी में आयोजित आईआरईएनए की 16वीं सभा में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने घोषणा की कि भारत 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण, हरित हाइड्रोजन, ग्रिड और विनिर्माण में करीब 300 अरब डॉलर के निवेश के द्वार खोल रहा है।
स्थिर नीतियों और पारदर्शी बाजार के दम पर भारत स्वच्छ ऊर्जा निवेश का वैश्विक केंद्र बन चुका है। जोशी ने तकनीकी हस्तांतरण, सस्ता वित्त, क्षमता निर्माण और मानक समन्वय पर जोर दिया, ताकि विकासशील देश तेजी से हरित क्रांति अपना सकें।
भारत अपने अनुभव और ज्ञान साझा करने को तत्पर है, खासकर सबसे कम विकसित और द्वीपीय देशों के साथ वैश्विक परिवर्तन को गति देने हेतु। ऊर्जा बदलाव केवल क्षमता नहीं, बल्कि लोगों, अवसरों और साझा भविष्य से जुड़ा है।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ सिद्धांत पर आधारित नीति समानता और समावेश को बढ़ावा देती है। 2030 तक 500 जीडब्ल्यू गैर-जीवाश्म क्षमता और 2070 तक नेट जीरो का संकल्प दृढ़।
2025 में ही 50 प्रतिशत क्षमता गैर-जीवाश्म से हासिल, पेरिस लक्ष्य से 5 वर्ष पूर्व। 266 जीडब्ल्यू से अधिक नवीकरणीय क्षमता भारत को शीर्षस्थान दिला चुकी।
तेजी से बढ़ते बाजार में भंडारण, ग्रिड उन्नयन, हरित गलियारे और 24×7 बिजली पर कार्य तेज। सौर, पवन, बैटरी व इलेक्ट्रोलाइजर विनिर्माण से आत्मनिर्भरता।
पीएम सूर्य घर योजना से 25 लाख घर लाभान्वित, लक्ष्य 1 करोड़। पीएम-कुसुम से 21.7 लाख किसानों को सौर पंप।
उच्च स्तरीय संवाद में लोगों-केंद्रित परिवर्तन पर बल। डोमिनिकन गणराज्य को अध्यक्षता बधाई, अन्य उपाध्यक्षों को शुभकामनाएं।
यूएई मंत्री से भेंट में जलवायु, स्वच्छ ऊर्जा व खाद्य सुरक्षा सहयोग मजबूत। 2014-24 समझौतों की समीक्षा, नवीकरणीय, विनिर्माण, भंडारण पर चर्चा।