
नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दोहराया। लोकतंत्र, मानवाधिकार, बहुलवाद, कानून का राज और संयुक्त राष्ट्र आधारित वैश्विक व्यवस्था जैसे साझा मूल्यों पर आधारित यह प्रतिबद्धता ऐतिहासिक है।
सुरक्षा चुनौतियों का सामना, समावेशी विकास, आर्थिक मजबूती, जलवायु-जैव विविधता संरक्षण और एसडीजी लक्ष्यों की प्राप्ति पर सहमति बनी। विस्तृत संयुक्त बयान में इन सभी बिंदुओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया।
गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में कोस्टा और वॉन डेर लेयेन उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ आए, जिसमें काजा कालास और मारोस शेफचोविच शामिल थे।
भारत-ईयू सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर सराहनीय कदम है, जो समुद्री सुरक्षा, रक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर खतरे, अंतरिक्ष और आतंकवाद निरोध में सहयोग बढ़ाएगा। सूचना सुरक्षा समझौते की वार्ता प्रारंभ होने से गोपनीय जानकारी आदान-प्रदान सुगम होगा।
संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर बहुपक्षीय व्यवस्था मजबूत करने और सुरक्षा परिषद सुधार की मांग की गई। यूरोप व इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा परस्पर जुड़ी है। यूएनक्लोस अनुरूप मुक्त इंडो-पैसिफिक के लिए प्रतिबद्धता जताई गई।
यूक्रेन युद्ध पर चिंता, शांति के कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन। ईरान व मध्य पूर्व पर संवाद पर जोर। गाजा में संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 2803 का स्वागत, मानवीय सहायता व दो-राज्य समाधान की वकालत।
आतंकवाद की कठोर निंदा, जिसमें पहलगाम (22 अप्रैल 2025) व लाल किले (10 नवंबर 2025) घटनाएं शामिल। कट्टरवाद, वित्तपोषण रोकने के लिए वैश्विक सहयोग।
यह शिखर सम्मेलन भारत-ईयू संबंधों का नया अध्याय खोलता है।