
नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय संयुक्त प्रेस वार्ता में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने भारत और यूरोपीय संघ की संयुक्त राष्ट्र चार्टर को आधार बनाकर अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत रखने की साझा जिम्मेदारी पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ चर्चा के बाद दिए गए बयान में कोस्टा ने दोनों पक्षों के सहयोग को और सशक्त बनाने की बात कही।
दुनिया की प्रमुख लोकतांत्रिक शक्तियों के रूप में भारत और ईयू बहुपक्षवाद के प्रबल समर्थक हैं। कोस्टा ने कहा कि महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद उनके विचारों की प्रासंगिकता और स्पष्ट हो गई- शांति हथियारों के संघर्ष से नहीं, अपितु कठिन परिस्थितियों में निहत्थे देशों के न्यायपूर्ण व्यवहार से प्राप्त होती है।
अपनी गोवा की जड़ों का जिक्र करते हुए कोस्टा ने कहा कि वे प्रवासी भारतीय नागरिक हैं और यूरोप-भारत संबंध उनके लिए निजी महत्व रखते हैं। शिखर सम्मेलन में यूक्रेन में न्यायपूर्ण शांति के लिए प्रतिबद्धता दोहराई गई, जिसमें उसकी संप्रभुता का सम्मान हो।
कोस्टा ने पीएम मोदी पर भरोसा जताया कि संवाद और कूटनीति से शांति की राह प्रशस्त कर सकते हैं। गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनने का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने भारत की क्षमताओं की सराहना की। बहुध्रुवीय विश्व में समृद्धि के लिए सुरक्षा सहयोग बढ़ाया जा रहा है।
इंडो-पैसिफिक से वैश्विक चुनौतियों तक संयुक्त प्रयासों से रणनीतिक विश्वास मजबूत हो रहा है। पहला व्यापक रक्षा-सुरक्षा ढांचा भविष्य के महत्वाकांक्षी कदमों की नींव है। यह साझेदारी नई ऊंचाइयों को छुएगी।