
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा कि डिजिटल तकनीकों की ताकत को पूरी मानवता तक पहुंचाने से मानवाधिकारों को बढ़ावा मिलता है। सभी के जीवन में व्यापक सुधार ही तकनीक की सच्ची क्षमता को उजागर करता है।
भारत ने डिजिटल साधनों का बड़े स्तर पर उपयोग कर 1.4 अरब नागरिकों के लिए न्याय, नागरिक व राजनीतिक अधिकारों तथा लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत किया है। महिलाओं का सशक्तिकरण भी इसकी बदौलत तेजी से आगे बढ़ा है।
जॉर्ज ने दिल्ली में हाल ही में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट का जिक्र किया, जिसमें 100 से अधिक देशों के 20 राष्ट्राध्यक्षों और 45 मंत्रियों ने शिरकत की। भारत और फ्रांस द्वारा सह-आयोजित इस सम्मेलन में एआई के लाभों को वैश्विक रूप से साझा करने पर सहमति बनी, जिसमें वैश्विक दक्षिण की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
विदेश मंत्री एस जयशंकर की अपील का हवाला देते हुए उन्होंने सबसे कमजोर वर्गों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का आह्वान किया। भारत का डिजिटल कार्यक्रम समग्र विकास मॉडल पर आधारित मानवाधिकार दृष्टिकोण का मजबूत आधार है।
आतंकवाद को मानवाधिकारों के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए जॉर्ज ने इसके खिलाफ एकजुट कार्रवाई की मांग की। परिषद को सभी रूपों में आतंक के विरुद्ध एकसुर बोलना चाहिए।
भारत का यह दृष्टिकोण डिजिटल समावेशिता के जरिए वैश्विक मानवाधिकार प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।