
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबि जॉर्ज ने डिजिटल उपकरणों की भूमिका पर प्रकाश डाला। 12 मार्च को दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि डिजिटल शक्ति को सभी तक पहुंचाने से मानवाधिकारों का वास्तविक प्रचार होता है।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के भाषण का हवाला देते हुए जॉर्ज ने कहा कि परिषद की चर्चाएं बयानों से आगे बढ़कर कमजोर वर्गों के जीवन में बदलाव लाएं। भारत एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है जो समग्र विकास पर आधारित है।
भारत ने डिजिटल टूल्स से न्याय पहुंच, नागरिक अधिकारों, 140 करोड़ लोगों की लोकतांत्रिक भागीदारी और महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है। नई दिल्ली के एआई इम्पैक्ट समिट में भी कहा गया कि एआई के लाभ वैश्विक स्तर पर समान रूप से बंटने चाहिए, जिसमें वैश्विक दक्षिण की भूमिका अहम है।
आतंकवाद को मानवाधिकारों के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए जॉर्ज ने परिषद से एकजुट होकर इसके खिलाफ लड़ाई जारी रखने की अपील की। भारतीय दूतावास ने वीडियो साझा कर इस संदेश को रेखांकित किया।
भारत का यह रुख डिजिटल क्रांति को अधिकारों से जोड़ते हुए वैश्विक मंच पर मजबूत संदेश देता है।