
नई दिल्ली में फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन अगाबेकियान ने कहा कि भारत फिलिस्तीन और इजरायल के बीच शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण पुल का काम कर सकता है। दोनों देशों से गहरे संबंध होने के कारण भारत की यह भूमिका स्वाभाविक होगी।
दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक और चौथी वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के लिए नई दिल्ली पहुंचीं अगाबेकियान ने उम्मीद जताई कि भारत गाजा पुनर्निर्माण और शांति प्रयासों में सक्रिय भागीदार बनेगा।
उन्होंने इन बैठकों को फिलिस्तीनी मुद्दे, गाजा की बहाली, शांति योजना और भारत-अरब हितों पर चर्चा का मंच बताया। ‘भारत दोनों का मित्र है, इसलिए विचार साझा कर पुल बना सकता है,’ उन्होंने जोर दिया।
31 जनवरी को भारत और यूएई की सह-अध्यक्षता में होने वाली बैठक में अरब लीग के सदस्य शामिल होंगे। न्यूयॉर्क घोषणापत्र को महत्वपूर्ण बताते हुए अगाबेकियान ने सहयोगियों के साथ उसकी जिम्मेदारियों को लागू करने का वादा किया।
घोषणापत्र के बाद फिलिस्तीनी नेतृत्व के कदमों पर उन्होंने कहा कि हस्ताक्षरकर्ता देशों के साथ मिलकर स्वतंत्रता की राह प्रशस्त की जाएगी। गाजा शांति योजना में भारत को न्योते पर उन्होंने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप निर्णय लेने की सलाह दी।
हमास से हथियार डालने और एकता की अपील की। हिंसा और पाकिस्तान-हमास संबंधों पर निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून व वार्ता का पक्ष लिया। भारत की कूटनीतिक भूमिका से मध्यपूर्व शांति को नई दिशा मिल सकती है।