
वाशिंगटन। भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के शासन में सख्त नियमों के बजाय भरोसे, समावेशिता और नवाचार को प्राथमिकता दे रहा है। मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने सीएसआईएस सम्मेलन में वर्चुअल संबोधन में यह बात कही।
नई दिल्ली से बोलते हुए सूद ने कहा कि एआई अब आर्थिक और रणनीतिक नीतियों का अभिन्न अंग बन चुका है। यह केवल कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर क्षेत्र में फैल गया है और डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
वैश्विक स्तर पर जेनरेटिव एआई में निवेश और डेटा सेंटर्स की ऊर्जा मांग बढ़ रही है। इससे एआई शासन आर्थिक रणनीति, जन विश्वास और सतत विकास से जुड़ गया है। भारत की नीति में सुरक्षा, पारदर्शिता, जवाबदेही और लचीलापन प्रमुख हैं।
2024 के इंडियाएआई मिशन के तहत साझा कम्प्यूटिंग, डेटा प्लेटफॉर्म, स्वदेशी मॉडल और कौशल विकास हो रहा है। स्टार्टअप्स को सस्ती हाई-परफॉर्मेंस कम्प्यूटिंग मिल रही है, जिससे लागत घटी है।
राष्ट्रीय एआई डेटा प्लेटफॉर्म पर हजारों डेटासेट उपलब्ध हैं। भारत एआई शिक्षा और वैश्विक मानकों में सक्रिय है। हालिया रिपोर्ट में कानूनी और तकनीकी उपायों का मिश्रण है।
एआई इम्पैक्ट समिट को देखते हुए सूद ने वैश्विक विजन की बात की, जहां कम्प्यूट, डेटा और मॉडल सबके लिए हों। सफलता एआई की क्षमता से नहीं, बल्कि सामाजिक लाभ से मापी जाएगी।