
वाशिंगटन। भारत का आगामी केंद्रीय बजट मौजूदा नीतियों की निरंतरता पर आधारित होगा, जिसमें राजकोषीय अनुशासन, आर्थिक स्थिरता और उच्च तकनीकी क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता मिलेगी। ओआरएफ अमेरिका के वरिष्ठ शोधकर्ता अनित मुखर्जी ने विशेषज्ञ विश्लेषण में कहा कि सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण में बड़े उलटफेर से बचेगी।
मुखर्जी के अनुसार, बजट में सुधारों की धीमी गति दिखेगी, जैसा कि ग्रामीण रोजगार योजनाओं के संशोधन में परिलक्षित हो रहा है। मनरेगा से प्रेरित यह योजना अब नकद हस्तांतरण के बजाय आजीविका सृजन पर केंद्रित हो रही है। 20 वर्षों बाद आर्थिक बदलावों के अनुरूप यह कदम स्वागतयोग्य है।
राज्यों को कार्यान्वयन में अधिक स्वायत्तता मिलेगी, डेटा प्रबंधन आधुनिक बनेगा, लेकिन योजना का मूल—सूखा या ऑफ-सीजन में रोजगार—अक्षुण्ण रहेगा। जीएसटी छूट के बावजूद राजस्व वृद्धि संभव है। बाह्य व्यापार स्थिर है, नए देशों से साझेदारी चालू खाता मजबूत कर सकती है।
एआई जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश आवश्यक है, जहां भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता सिद्ध है। अमेरिकी व्यापार नीतियों का असर दिख रहा है, लेकिन घरेलू सुरक्षा उपाय हैं। भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते से अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
कुल मिलाकर, वित्त मंत्री मुख्य आर्थिक लक्ष्यों पर नजर रखेंगे, जो विकास की गारंटी देंगे।