
नई दिल्ली। भारत और क्यूबा ने आपसी सहयोग और एकजुटता पर आधारित द्विपक्षीय संबंधों को और सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। यह संकल्प 1960 में स्थापित राजनयिक संबंधों की 66वीं वर्षगांठ पर लिया गया। भारत उन चुनिंदा एशियाई देशों में शामिल था जिन्होंने क्यूबाई क्रांति को सबसे पहले मान्यता दी थी।
प्रारंभिक वर्षों में चे ग्वेरा व फिदेल कास्त्रो की भारत यात्राएं तथा नेहरू के साथ उनके संवादों ने रिश्तों को ठोस आधार प्रदान किया। पिछले साल संबंधों में तेजी आई। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और क्यूबा के राष्ट्रपति डियाज-कैनेल की भेंट इसका प्रमाण थी।
क्यूबा के उपप्रधानमंत्री की भारत यात्रा तथा भारत के विदेश राज्य मंत्री की हवाना यात्रा से कानूनी व सांस्कृतिक समझौते हुए। भारत क्यूबा के फार्मा क्षेत्र का प्रमुख साझीदार है। बायोटेक, आईटी, पर्यटन, कृषि, ऊर्जा व खनन में नई संभावनाएं खुल रही हैं।
आईटीईसी कार्यक्रमों से क्षमता निर्माण हो रहा है। स्वास्थ्य, आयुर्वेद व आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ा। शिक्षा, संस्कृति, खेल व नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों ने भी बंधन मजबूत किए। 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता से नए द्वार खुलेंगे।
नवंबर में तूफान मेलिसा प्रभावित क्यूबा को भारत ने 20 टन सहायता भेजी। इसमें स्वास्थ्य इकाइयां, दवाएं, जनरेटर, टेंट, सोलर लैंप आदि शामिल थे। क्यूबा के विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर भारत व ईएएम जयशंकर का आभार माना। यह मानवीय सहयोग रिश्तों को और गहरा बनाएगा।