
इस्लामाबाद। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के आंखों के इलाज को लेकर राजनीतिक बवाल तेज हो गया है। मंगलवार को पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस) में उनकी दूसरी एंटी-वीईजीएफ इंट्राविट्रियल इंजेक्शन की डोज दी गई, जिस पर पार्टी ने सरकार की ‘गुप्तता’ पर सवाल ठोक दिए हैं।
जनवरी के अंत में खान को राइट सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन (सीआरवीओ) की बीमारी का पता चला था। पहला प्रोसीजर 24 जनवरी को हुआ, लेकिन सरकार ने पांच दिन बाद इसकी पुष्टि की। तब से विपक्ष सरकार पर पारदर्शिता की कमी, उचित इलाज न देने और निजी डॉक्टरों को पहुंच न रोकने के आरोप लगा रहा है। सरकार इनकार करती है।
पीआईएमएस के चिकित्सक के अनुसार, प्रक्रिया से पहले विशेषज्ञ बोर्ड ने जांच की। कार्डियोलॉजिस्ट ने इकोकार्डियोग्राफी और ईसीजी किया, फिजिशियन भी मौजूद रहा। पीआईएमएस और रावलपिंडी के अल-शिफा आई हॉस्पिटल के विट्रियो-रेटिनल सर्जन की देखरेख में इंजेक्शन दिया गया।
पूरी प्रक्रिया डे केयर सर्जरी की तरह चली। खान की हालत स्थिर रही और उन्हें निर्देशों व फॉलो-अप के साथ छुट्टी दे दी गई। परिवार शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाना चाहता है, जो इस्लामाबाद में है।
संसदीय मामلات मंत्री तारिक फजल चौधरी ने एक्स पर कहा कि सरकार ने सुरक्षा के बीच सभी जरूरतें पूरी कीं। तीसरा इंजेक्शन 24 मार्च को होगा। पीटीआई ने इस पर ऐतराज जताते हुए कहा कि रहस्य से सवाल बढ़ते हैं, पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने शिफा में स्वतंत्र इलाज की मांग दोहराई।
यह विवाद पाकिस्तान की सियासत में गहरे विभाजन को उजागर करता है, जहां खान का स्वास्थ्य बड़ा मुद्दा बन गया है। पारदर्शिता के बिना तनाव बना रहेगा।