
पश्चिम एशिया के संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। बुधवार को घोषणा की गई कि उसके 32 सदस्य देश अपने आपातकालीन भंडारों से 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में उतारेंगे। यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति में आई कमी को पूरा करने के लिए उठाया गया है, जो मिडिल ईस्ट के संघर्ष से प्रभावित हो रही है।
28 फरवरी से भड़के इस विवाद ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल के प्रवाह को बुरी तरह प्रभावित किया है। पहले जहां प्रतिदिन औसतन 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और उत्पाद गुजरते थे, जो विश्व समुद्री तेल व्यापार का 25 प्रतिशत है, वहीं अब यह मात्र 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है। इससे क्षेत्र की कंपनियां उत्पादन घटा रही हैं या बंद कर रही हैं।
आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने इसे संगठन के इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि तेल बाजार की चुनौतियां अभूतपूर्व हैं और वैश्विक बाजार के लिए वैश्विक प्रतिक्रिया जरूरी है। सदस्य देशों के पास 1.2 बिलियन बैरल से अधिक रणनीतिक भंडार हैं, साथ ही 600 मिलियन बैरल उद्योगिक भंडार भी सरकारी नियंत्रण में हैं।
यह छठा मौका है जब आईईए ने ऐसा सामूहिक कदम उठाया है। पहले यह 1991, 2005, 2011 और 2022 में दो बार हो चुका। आपात बैठक में मिडिल ईस्ट संकट का आकलन कर यह निर्णय लिया गया। तेल होर्मुज से बायपास करने के विकल्प सीमित हैं, इसलिए यह कदम बाजार को स्थिर रखने के लिए अनिवार्य था।
यह फैसला तेल कीमतों पर अंकुश लगाने और आर्थिक प्रभावों को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। अब नजरें इसकी सफल कार्यान्वयन और क्षेत्रीय शांति पर हैं। ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक मजबूत संदेश है।