
पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध ने तमिलनाडु के सैकड़ों मछुआरों की जिंदगी को मुश्किल में डाल दिया है। ईरान और आसपास के देशों में काम करने वाले ये मछुआरे परिवहन व्यवस्था ठप होने से घर लौट नहीं पा रहे। राज्य के तटीय इलाकों में उनके परिवार चिंता में डूबे हुए हैं।
तमिलनाडु मत्स्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, कन्याकुमारी, तूतीकोरिन, तिरुनेलवेली, रामनाथपुरम और कडलूर जिले के 593 मछुआरे इस समय ईरान क्षेत्र में फंसे हैं। इन जिलों में मछली पकड़ने का काम परिवारों की रोजी-रोटी का प्रमुख स्रोत है।
हालांकि मछुआरों की ओर से कोई आपातकालीन संदेश नहीं आया है, लेकिन परिवारों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। ईरान ने बंदरगाह और हवाई अड्डे अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं, जिससे निकासी अभियान असंभव हो गया है।
विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “मछुआरों से कोई प्रत्यक्ष मदद की मांग नहीं आई, सिर्फ परिजनों ने चिंता जताई है। सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और संभव प्रयास कर रही है।”
ईरान में भारतीय दूतावास भारतीयों की मदद के लिए हेल्पलाइन और ईमेल जारी कर रहा है। इस बीच कन्याकुमारी के दो मछुआरों के परिजनों ने मदुरै हाईकोर्ट में याचिका दायर की। केंद्र ने बताया कि रास्ते बंद हैं, लेकिन दूतावास सहायता दे रहा है। अदालत ने याचिकाएं निपटाईं और विवरण दूतावास को देने को कहा।
तिरुनेलवेली सांसद सी. रॉबर्ट ब्रूस ने विदेश मंत्री से 43 मछुआरों की सुरक्षित वापसी की मांग की। ये घटनाक्रम मछुआरों की सुरक्षित घर वापसी की उम्मीद जगाते हैं।