
हर साल 27 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय होलोकॉस्ट स्मृति दिवस मनाया जाता है, जो मानव इतिहास के सबसे क्रूर अध्याय को याद करने का अवसर प्रदान करता है। भारत में आयोजित इस कार्यक्रम में विदेश सचिव विक्रम मिस्री की उपस्थिति ने वैश्विक एकजुटता को रेखांकित किया।
भारत में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने कहा कि यह दिन विश्व समुदाय द्वारा यहूदी लोगों के विनाश की कोशिशों को मान्यता देने का है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी में जन्मी यह घातक नस्लवादी विचारधारा ने पूरे यूरोप को अपनी चपेट में ले लिया था।
उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं को दोहराने से रोकने के लिए स्मृति हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। विश्व भर से आए प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने विशेष रूप से विदेश सचिव मिस्री का धन्यवाद किया।
अजार ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय होलोकॉस्ट स्मृति गठबंधन का उल्लेख किया, जो यहूदी-विरोधी तत्वों से संघर्ष करता है और शिक्षा को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने भारत सहित सभी देशों को इसमें शामिल होने का न्योता दिया।
नाजी शासन ने 1933 से 1945 तक 60 लाख से अधिक यहूदियों के साथ रोमा, सिंती समुदायों का भी संहार किया। आउशविट्ज मुक्ति के 81 वर्ष बाद यह दिन यातनाओं की याद दिलाता है और भविष्य के लिए चेतावनी देता है।
आज के दौर में असहिष्णुता के बढ़ते खतरे के बीच यह स्मृति न केवल शोक का प्रतीक है, बल्कि एकजुट होकर इतिहास से सबक लेने का संकल्प भी है।