
संयुक्त राष्ट्र, 8 मार्च। संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक ने भारत की मानवाधिकार योद्धा हंसा मेहता की ऐतिहासिक लड़ाई को आज के एआई दौर से जोड़ा। उन्होंने कहा कि मेहता का दृढ़ संकल्प महिलाओं के अधिकारों के लिए चल रहे संघर्षों को नई दिशा देता है।
बेयरबॉक ने वार्षिक हंसा मेहता स्मृति व्याख्यान में बताया कि 1948 में मेहता ने सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा के पहले अनुच्छेद में ‘सभी पुरुष’ को ‘सभी मनुष्य’ करने का प्रस्ताव रखा। शुरुआती अस्वीकृति के बावजूद वे नहीं रुकीं और सफल रहीं।
यह बदलाव महिलाओं को वैश्विक अधिकारों में समान स्थान दिलाने वाला साबित हुआ। भारत के स्थायी मिशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था ‘सामाजिक परिवर्तन के लिए बाधाएं तोड़ना: डॉ. हंसा मेहता का प्रेरक जीवन’।
बेयरबॉक ने चेतावनी दी कि एआई प्रगति का वादा करता है, लेकिन महिलाओं को डिजिटल पहुंच में पीछे छोड़ देता है। 96 प्रतिशत गैर-सहमति डीपफेक अश्लील सामग्री में महिलाएं निशाना हैं।
उन्होंने भारत के दूसरे एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन की मेजबानी की सराहना की, जो समावेशी विकास का संदेश देता है। ‘एक व्यक्ति इतना बदलाव ला सकता है, तो पूरी मानवता क्या कर सकती है, सोचिए,’ उन्होंने समापन में कहा। मेहता संविधान सभा की 15 महिलाओं में शामिल रहीं।