
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया। उन्होंने विकासशील देशों की तीव्र आर्थिक प्रगति को रेखांकित करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया।
गुटेरेस ने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं का वैश्विक जीडीपी में हिस्सा लगातार कम हो रहा है, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाएं आकार, शक्ति और प्रभाव में वृद्धि कर रही हैं। दक्षिण-दक्षिण व्यापार अब उत्तर-उत्तर व्यापार को पीछे छोड़ चुका है।
उन्होंने चेतावनी दी कि 1945 में स्थापित संस्थाएं आज की चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ हैं। इसलिए, सुरक्षा परिषद की संरचना और वित्तीय संस्थानों की सत्ता व्यवस्था को आधुनिक बनाना अनिवार्य है।
संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष विकासशील देशों में 4.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि विकसित देशों में यह मात्र 2.9 प्रतिशत रही। भारत ने 7.4 प्रतिशत की दर से विश्व की सबसे तेज विकास करने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था का रिकॉर्ड बनाया, जो सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की उसकी मांग को मजबूत करता है।
अपने कार्यकाल के अंतिम वार्षिक संबोधन में गुटेरेस ने वैश्विक संकटों के बीच भी संयुक्त राष्ट्र की नई भूमिकाओं की सराहना की। उन्होंने कुछ ताकतों द्वारा बहुपक्षवाद को कमजोर करने की कोशिशों का उल्लेख किया, बिना नाम लिए।
‘हम हार नहीं मानेंगे,’ उन्होंने दृढ़ संकल्प के साथ कहा। वित्तीय संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने सदस्य देशों की देनदारियों पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी की। गुटेरेस का यह आह्वान वैश्विक शासन में समावेशी बदलाव की दिशा में एक नया अध्याय खोल सकता है।