
वॉशिंगटन, 11 जनवरी। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों ने विश्व हिंदू प्रवासी संगठनों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास गुहार लगाने को मजबूर कर दिया है। चिट्ठी में हत्याओं, लिंचिंग और सरकारी उदासीनता का जिक्र करते हुए भारत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
दीपू चंद्र दास नामक युवा हिंदू की जिंदा जलाने की घटना ने इस अपील को बल दिया है। अगस्त 2024 से हिंसा चरम पर है, जो दिसंबर तक जारी रही। मनगढ़ंत ईशनिंदा के आरोपों पर लिंचिंग की घटनाएं आम हो गई हैं, जैसा कि 2024 में उत्सव मंडल की हत्या में देखा गया।
चिट्ठी में 1950 के लियाकत-नेहरू पैक्ट की विफलता और 1971 युद्ध के बाद हिंदू शरणार्थियों को वापस भेजे जाने का उल्लेख है। वर्तमान को हिंदू नरसंहार करार देते हुए मीडिया की चुप्पी पर सवाल उठाए गए, जो गलत सूचनाओं से और गहरी हुई।
इस्कॉन संत चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 से जेल में रखा गया है, जमानत नामंजूर। यूनुस सरकार पर सांप्रदायिक हिंसा को नकारने का आरोप है, जो भीड़ को खुली छूट देता है।
आंकड़े भयावह हैं: अगस्त 2024 से जून 2025 तक 2442 से अधिक हमले, ज्यादातर हिंदुओं पर। 82 मौतें अगस्त-नवंबर 2024 में, बलात्कार, मंदिर विध्वंस सहित। पिछले 35 दिनों में 11 हिंदू मारे गए।
भारत से निंदा, मानवीय कॉरिडोर, शरणार्थी शिविर, यूएन निगरानी वाले सुरक्षित क्षेत्र, संयुक्त राष्ट्र में मुद्दा उठाने और कट्टरपंथियों पर दबाव की मांग। अमेरिका में 31 जनवरी को मौन विरोध की योजना। यह संघर्ष अल्पसंख्यकों के भविष्य का सवाल है।