
नई दिल्ली। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज अपने पहले भारत दौरे पर यहां पहुंच गए हैं। यह उनका चांसलर पद पर एशिया का प्रथम दौरा भी है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ महत्वपूर्ण वार्ता के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भागीदारी का कार्यक्रम है।
हाल के वर्षों में भारत-जर्मनी संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ये रिश्ते साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, व्यापारिक मजबूती, रक्षा सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शिक्षा के क्षेत्रों पर टिके हैं। ये सहयोग इंडो-पैसिफिक और यूरोप के भविष्य को परिभाषित कर रहे हैं।
जर्मनी भारत का प्रमुख यूरोपीय रणनीतिक साझेदार है। 7 मार्च 1951 को भारत ने जर्मनी के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले प्रारंभिक देशों में शुमार था। 2026 में 75 वर्ष पूरे होने पर विशेष उत्सव होगा।
18 मई 2000 को हस्ताक्षरित 21वीं सदी की साझेदारी एजेंडे ने 2025 में चांदी का जश्न मनाया। विदेश मंत्री एस जयशंकर और जर्मन समकक्ष ने मई में इसका प्रतीक चिन्ह जारी किया।
2011 से सक्रिय इंटर-गवर्नमेंटल कंसल्टेशन (आईजीसी) के माध्यम से सहयोग की समीक्षा होती है। सातवां आईजीसी अक्टूबर 2024 में नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
दोनों देश बहुपक्षवाद, नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हैं। जी4 ढांचे में यूएनएससी विस्तार पर एक-दूसरे का साथ देते हैं। विदेश मंत्रियों की अंतिम बैठक सितंबर 2025 में न्यूयॉर्क में हुई।
पीएम मोदी ने 2022 में बर्लिन और म्यूनिख का दौरा किया। चांसलर शोल्ज 2023 और 2024 में भारत आए। मर्ज के साथ मोदी की पहली बात 20 मई 2025 को हुई, उसके बाद जी7 और जी20 में भेंटें।
जर्मनी में 3 लाख भारतीय, जिसमें 60,000 छात्र हैं, आईटी, बैंकिंग, अनुसंधान等领域 में योगदान दे रहे हैं।
यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देगा।