
अहमदाबाद में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव की रंगीन शुरुआत के बाद जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ महत्वपूर्ण चर्चा की। उन्होंने भारत को जर्मनी का सबसे पसंदीदा साझेदार बताते हुए द्विपक्षीय रिश्तों को नई बुलंदियों पर ले जाने की इच्छा जताई।
गांधीनगर पहुंचे मर्ज ने महात्मा गांधी के जन्मस्थान पर जाकर उनकी शिक्षाओं का हवाला दिया। ‘वह बदलाव बनो जो तुम दुनिया में देखना चाहते हो’, इस उक्ति को दोहराते हुए उन्होंने मोदी से कहा कि दोनों देश मिलकर संबंधों को मजबूत बनाएंगे।
अहमदाबाद को आधुनिक भारत का जन्मस्थान बताते हुए मर्ज ने गुजरात की आर्थिक गतिशीलता की सराहना की। टेक्सटाइल से स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क और स्टार्टअप्स तक फैली यह प्रगति दोनों देशों के सहयोग का आधार है।
वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच साझा मूल्य, आर्थिक क्षमता और कुशल श्रमिक दोनों को रणनीतिक साझेदारी गहराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। संरक्षणवाद के बढ़ते दौर में मुक्त व्यापार और खुले बाजार पर जोर देते हुए मर्ज ने सप्लाई चेन को हथियार बनाने का विरोध किया।
भारत को जी20 की सबसे तेज अर्थव्यवस्था और इंडो-पैसिफिक का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि जर्मनी के लिए भारत न केवल जरूरी बल्कि पसंदीदा पार्टनर है। यूरोप और ट्रांसअटलांटिक संबंध महत्वपूर्ण हैं लेकिन व्यापक नेटवर्क में भारत अग्रणी है।
तीन मुख्य बिंदुओं पर फोकस करते हुए मर्ज ने स्वतंत्रता-सुरक्षा वाला अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, महाशक्ति राजनीति और यूक्रेन संकट जैसे बदलावों का जिक्र किया। सुरक्षा नीति में निकट सहयोग की वकालत की।
रक्षा क्षेत्र में संयुक्त अभ्यास, पोर्ट विजिट और एमओयू के जरिए सहयोग बढ़ेगा, जो भारत की रूस निर्भरता कम करेगा। आर्थिक संबंध भी तेज होंगे। जर्मनी की तकनीकी ताकत और भारत का लोकतांत्रिक जोश इस साझेदारी को मजबूत बनाएगा।